Home उत्तराखण्ड जोशीमठ में आपदा प्रभावितों का धरना दूसरे दिन भी जारी,

जोशीमठ में आपदा प्रभावितों का धरना दूसरे दिन भी जारी,

11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज; पूर्व टैक्सी यूनियन अध्यक्ष ने कहा— 'मुआवजा वापस लो, पर हमारा घर मत तोड़ो'

by zerogroundnews

जोशीमठ तहसील परिसर में अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर आपदा प्रभावितों का धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी पूरी ऊर्जा और आक्रोश के साथ जारी रहा। सोमवार से शुरू हुआ यह 48 घंटे का क्रमिक आंदोलन बुधवार तक चलेगा। अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर डटे आपदा प्रभावितों का साफ कहना है कि सरकार और प्रशासन उनके सब्र का इम्तिहान न ले। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में नगर क्षेत्र में ड्रेनेज (निकासी) और सुरक्षात्मक कार्यों को युद्धस्तर पर तेज करना, तथा प्रधानमंत्री आवास योजना व राजीव आवास योजना के तहत बने भवनों का उचित और व्यावहारिक मुआवजा तय करना शामिल है। इसके साथ ही प्रभावितों ने पुरजोर तरीके से मांग उठाई कि वर्तमान में प्रशासन द्वारा जिन 55 भवनों को ढहाने की कार्रवाई की जा रही है, उसे तुरंत रोका जाए। प्रभावितों का कहना है कि घरों को तोड़ने से पहले उनमें रह रहे परिवारों को किसी सुरक्षित और उचित स्थान पर स्थाई रूप से बसाया जाए, ताकि वे बेघर न हों।

​’खून-पसीने की कमाई से बना आशियाना नहीं टूटने देंगे’
​आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पूर्व टैक्सी यूनियन अध्यक्ष चंडी प्रसाद बहुगुणा ने अपने भावुक और तीखे संबोधन से धरना स्थल पर मौजूद सभी लोगों में नया जोश भर दिया। उन्होंने प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भी अपने मकान का मुआवजा मिला है, लेकिन वह अपने आशियाने को टूटते हुए नहीं देख सकते। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “प्रशासन ने साल 2023 में मुझे जो मुआवजे की राशि दी थी, उसे वह वापस ले ले। मैं खुद वह पैसा सरकार को लौटाने को तैयार हूँ, लेकिन अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और मेहनत से खड़े किए गए घर को टूटने नहीं दूंगा।”

​वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ आंदोलनकारी अतुल सती ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रभावितों की 11 सूत्रीय मांगों पर शासन-प्रशासन ने जल्द से जल्द कोई ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को बेहद उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है और जोशीमठ की इन बुनियादी व गंभीर समस्याओं पर सरकार को अविलंब फैसला लेना ही होगा। इस दो दिवसीय आंदोलन में पीयूष जैन, दिनेश, सचिन रावत, बाला देवी (बीला देवी), रुक्मणी देवी, सुरेशी देवी, भारणी, हरीश लाल, कलम सिंह, भरत मखियाल, गुड्डू सिलवाल, सावित्री देवी, मदन प्रसाद कपरूवाण, हरीश थपलियाल, बलवन्त सिंह, दीपक कुमार टम्टा, विनोद कुमार , मो० शमीम, प्रेमानन्द भट्ट, प्रकाश थपलियाल, पवन कुमार, अजीत राघव, नितिन परमार, शकुंतला देवी, नीलम परमार, और गीता परमार सहित सैकड़ों आपदा प्रभावित शामिल रहे।