Home उत्तराखण्ड बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर सियासी सरगर्मी तेज:

बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर सियासी सरगर्मी तेज:

दावेदारों की फौज के बीच भाजपा में अंतर्विरोध,

by zerogroundnews

चमोली।
बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर आगामी चुनावी माहौल अभी से गरमाने लगा है। इस सीट पर जहां एक तरफ दावेदारों की लंबी फौज खड़ी है, वहीं कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। गौरतलब है कि भंडारी 17 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद हुए बद्रीनाथ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी लखपत सिंह बुटोला के हाथों 5,224 वोटों से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इतना ही नहीं, इसके बाद हुए जिला पंचायत चुनाव में भी वह अपनी पत्नी और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी की कुर्सी नहीं बचा पाए; रजनी भंडारी को रानो वार्ड (जिला पंचायत सदस्य) से पूर्व फौजी लक्ष्मण खत्री ने 419 वोटों से हरा दिया। लगातार दो बड़ी हार के बाद अब भाजपा के भीतर ही राजेंद्र सिंह भंडारी के नाम को लेकर भारी असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
​सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में भाजपा के कई स्थानीय चेहरों की चर्चाएं जोरों पर हैं। इनमें जोशीमठ विकासखंड से कृष्णमणि थपलियाल, किशोर पंवार, और बद्रीनाथ-केदारनाथ मन्दिर समिति के वर्तमान उपाध्यक्ष प्रसाद ऋषि प्रसाद का नाम रेस में है, तो वहीं दशौली विकासखंड से रघुवीर सिंह बिष्ट, गजेंद्र रावत, अतुल शाह और पोखरी से राजेंद्र सिंह भंडारी व गजपाल बर्तवाल के नामों को लेकर कयासबाजी चल रही है। हालांकि, धरातल पर भाजपा कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह भंडारी के नाम पर सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने जिस रणनीति के तहत भंडारी को भाजपा में शामिल कराया था, उसे आम कार्यकर्ताओं ने दिल से स्वीकार नहीं किया है और वे बलूनी के इस फैसले के साथ खड़े होते नहीं दिख रहे हैं। संगठन के भीतर स्थिति यह है कि कार्यकर्ता पुराना चेहरा दोहराने के बजाय बद्रीनाथ सीट पर किसी नए विकल्प की तलाश में हैं। ऐसे में यदि पार्टी दोबारा भंडारी पर दांव खेलती है, तो अंदरूनी ‘साइलेंट पॉलिटिक्स’ भाजपा का समीकरण बिगाड़ सकती है। चर्चा यह भी है कि यदि टिकट को लेकर घमासान ज्यादा बढ़ा, तो पार्टी पूर्व विधायक व वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट पर भी दांव खेल सकती है।

​दूसरी तरफ,मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट और मजबूत नजर आ रही है। उपचुनाव में भंडारी को बड़े अंतर से धूल चटाने वाले वर्तमान विधायक लखपत सिंह बुटोला का टिकट तय माना जा रहा है और पार्टी उन पर ही पूरा भरोसा जताएगी। बहरहाल, कांग्रेस की इस साफ रणनीति के मुकाबले भाजपा के लिए अंदरूनी गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को थामकर इस सीट पर राह बनाना फिलहाल कतई आसान नजर नहीं आता।