आपदा के दंश से जूझ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन नगरी जोशीमठ की सुरक्षा और प्रभावितों के संपूर्ण पुनर्वास को लेकर एक बार फिर जन-आक्रोश फूट पड़ा है। ‘जोशीमठ बचाव संघर्ष समिति’ ने सरकार के साथ पूर्व में बनी 11 सूत्रीय सहमति पर तीन साल बाद भी पूरी तरह अमल न होने पर गहरा रोष जताया है। मुख्यमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में समिति ने आरोप लगाया है कि केंद्र से जोशीमठ के स्थिरीकरण के लिए स्वीकृत 1640 करोड़ रुपये के बाद शुरू हुए कार्यों में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं और प्रभावितों को वैज्ञानिक इंजीनियरिंग के बजाय उजाड़ने की कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। भूमि बंदोबस्ती, उचित मुआवजा, तपोवन विष्णुगाड परियोजना की समीक्षा और समयबद्ध सुरक्षा कार्यों की अनदेखी से नाराज जनता ने उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी है कि वे आज से अपनी मांगों को लेकर 48 घंटे के अनवरत धरने पर बैठ रहे हैं; और यदि अब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक लंबे और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस अवसर पर जोशीमठ बचाव संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती, भाजपा की गांधीनगर वार्ड सभासद ललिता देवी, भाजपा नेता मुकेश कुमार, श्रीमती लक्ष्मी देवी ,श्रीमती गीता परमार, श्रीमती नीलम परमार ,मदन कपरुंवाण, कुशलानंद डिमरी, दीपक टम्टा, सचिन आदि मौजूद रहे
