Home उत्तराखण्ड बीकेटीसी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की सुगबुगाहट;

बीकेटीसी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की सुगबुगाहट;

मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की तैयारी, पांच चरणों में विरोध की चेतावनी

by zerogroundnews

ज्योतिर्मठ।

विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारियों के बीच अपनी लंबित और न्यायोचित मांगों को लेकर असंतोष गहराने लगा है। बीकेटीसी कर्मचारी संघ ने अपनी समस्याओं के त्वरित निवारण हेतु सूबे के मुख्यमंत्री को संबोधित एक औपचारिक ज्ञापन का खाका तैयार कर लिया है। इस व्यापक रणनीति के तहत कर्मचारी संघ क्षेत्रीय जिलाधिकारी चमोली तथा उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ के माध्यम से शासन स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करने जा रहा है।

​कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजेन्द्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बीकेटीसी के कर्मचारी लंबे समय से मंदिर व्यवस्था, देश-विदेश से आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों की सुगम सेवा तथा समिति के प्रशासनिक कार्यों को पूर्ण निष्ठा, समर्पण और मुस्तैदी से संभालते आ रहे हैं। इसके बावजूद, कर्मचारियों की सेवा नियमावली, उचित वेतनमान, लंबित पदोन्नति तथा नियमितीकरण जैसी महत्वपूर्ण एवं मूलभूत मांगों पर लंबे समय से शासन और प्रशासनिक स्तर पर केवल आश्वासन ही मिले हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी निराशा है। संघ का कहना है कि पूर्व में भी कई बार प्रशासन को समस्याओं से अवगत कराया गया, परंतु कोई ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जा सका।

​मुख्यमंत्री को भेजे जाने वाले इस प्रस्तावित ज्ञापन में संघ ने स्पष्ट किया है कि वे शासन के साथ टकराव नहीं, बल्कि सौहार्दपूर्ण माहौल में समस्याओं का तार्किक समाधान चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सरकार से कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ तत्काल एक उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित करने का विनम्र अनुरोध किया है। हालांकि, संगठन ने इसके साथ ही अपनी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण लड़ाई का पूरा रोडमैप भी सार्वजनिक कर दिया है। यदि एक निश्चित समयावधि के भीतर मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी महासंघ चरणबद्ध ढंग से व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलने को विवश होगा।

​आंदोलन का घोषित प्रारूप: पांच चरणों में थमेगी व्यवस्था

प्रशासन को सचेत करते हुए कर्मचारी संघ ने अपने आंदोलन को निम्नलिखित पांच चरणों में क्रियान्वित करने की चेतावनी दी है:

​प्रथम चरण: आधिकारिक रूप से ज्ञापन प्रेषण तथा शासन स्तर पर वार्ता हेतु विशेष अनुरोध।
​द्वितीय चरण: निर्धारित समयावधि में सुनवाई न होने पर सभी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्यस्थल पर सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे।
​तृतीय चरण: विरोध के अगले कदम के रूप में समिति के कार्यालयों के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
​चतुर्थ चरण: आंदोलन को और अधिक तीव्र करते हुए पूर्ण रूप से चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत।
​पंचम चरण: अंतिम विकल्प के रूप में वैधानिक एवं पूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन की अगली कड़ी के तहत कड़े फैसले लिए जाएंगे।
​संघ के अध्यक्ष विजेन्द्र सिंह बिष्ट ने दो टूक शब्दों में कहा है कि कर्मचारी संगठन सदैव ही यात्रा व्यवस्था को सुचारू रखने के पक्ष में है और वे नहीं चाहते कि किसी भी प्रकार के गतिरोध से श्रद्धालुओं को असुविधा हो। परंतु, यदि उनकी मांगों को निरंतर नजरअंदाज किया जाता रहा, तो उत्पन्न होने वाली किसी भी विपरीत प्रशासनिक परिस्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं स्थानीय प्रशासन की होगी। संघ ने वर्तमान में कर्मचारियों से उनकी वास्तविक और विशिष्ट मांगों (जैसे वेतन विसंगति, वरिष्ठता सूची, और अन्य भत्ते) का विवरण जुटाना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें अंतिम रूप से इस मुख्य ज्ञापन का हिस्सा बनाया जा सके।