ज्योतिर्मठ।
उत्तराखंड के वन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल रविवार को एक दिवसीय दौरे पर सीमांत व संवेदनशील क्षेत्र ज्योतिर्मठ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने और स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। ज्योतिर्मठ पहुंचने पर मुख्य अतिथि वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सबसे पहले ‘नंदा देवी बायोडायवर्सिटी मॉनिटरिंग एक्सपीडिशन 2026’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वन विभाग के विशेषज्ञों, आईटीबीपी व एसडीआरएफ के जवानों सहित देश के जाने-माने वैज्ञानिकों से सुसज्जित यह दल 22 दिनों तक अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में रहकर पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा।
इस ऐतिहासिक अभियान का शुभारंभ करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने नंदा देवी क्षेत्र की संवेदनशीलता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलावों को देखते हुए अब एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया जा रहा है। अब तक इस क्षेत्र में हर 10 वर्ष में वैज्ञानिक अध्ययन अभियान आयोजित किया जाता था, लेकिन अब इसे प्रत्येक 5 वर्ष में आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही केंद्र सरकार से उच्च स्तरीय वार्ता की जाएगी। उन्होंने इस दुर्गम अभियान में देश के वरिष्ठ व प्रख्यात वैज्ञानिक डॉक्टर जी. एस. रावत की उपस्थिति को उत्तराखंड के लिए गौरव की बात बताया और पूर्व में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों व जवानों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
स्वास्थ्य सुविधाओं का स्थलीय निरीक्षण और चिकित्सालय का विस्तार
वन एवं स्वास्थ्य मंत्री ने इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ज्योतिर्मठ का औचक स्थलीय निरीक्षण किया। चिकित्सालय की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लेते हुए उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों व स्टाफ को कड़े निर्देश दिए कि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ चारधाम यात्रा और पर्यटन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को चौबीसों घंटे उच्च स्तरीय और त्वरित इलाज मुहैया कराया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए कि जोशीमठ क्षेत्र में प्रस्तावित 50 बेड के नए आधुनिक अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल निर्माण हेतु भूमि के चयन और अन्य आवश्यक प्रशासनिक व कागजी कार्रवाई को अति शीघ्र शुरू किया जाए, ताकि सीमांत क्षेत्र की जनता को जल्द से जल्द आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलना शुरू हो सके।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सौंपे ज्ञापन …
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने क्षेत्र की धार्मिक यात्राओं को सुगम बनाने के संबंध में एक मांग पत्र सौंपा। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि डुमक-कलगोठ पैदल मार्ग को विकसित कर इसे रुद्रनाथ यात्रा का वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि इस मार्ग के खुलने से न सिर्फ रुद्रनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को एक नया और सुरक्षित रास्ता मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्मकार बोर्ड के सदस्य कृष्णमणि थपलियाल ने भविष्य बद्री मंदिर से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण मांग को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने वन मंत्री से कहा कि भविष्य बद्री मंदिर के अंतर्गत आने वाली वन भूमि को जल्द से जल्द वैधानिक रूप से मंदिर समिति के नाम स्थानांतरित किया जाए. थपलियाल ने कहा कि यदि सरकार के स्तर से यह भूमि हस्तांतरण समय पर संपन्न हो जाता है, तो भविष्य में वहां एक भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय युवाओं के पलायन को रोकने के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में भी अन्य कॉर्बेट और राजाजी जैसे नेशनल पार्कों की तर्ज पर ‘पार्क सफारी’ शुरू करने की वकालत की।
भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष अमित सती ने क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के संबंध में वन मंत्री को एक पत्र प्रेषित किया। उन्होंने अपने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि औली-सुनील से गौंख गांव मार्ग को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण कार्य जो कि लंबे समय से लंबित है, उसे जनहित में अति शीघ्र शुरू करवाया जाए ताकि स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन में हो रही भारी दिक्कतों से निजात मिल सके।
नीति घाटी के सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह बुटोला ने पैनखंडा क्षेत्र की विभिन्न गंभीर समस्याओं से कैबिनेट मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने एक विस्तृत ज्ञापन पत्र सौंपते हुए मांग की कि सीमांत क्षेत्र के अस्पतालों का चौमुखी विकास किया जाए और वहां आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति की जाए। बुटोला ने आगे मांग रखी कि रैणी गांव में महान पर्यावरणविद गौरा देवी के नाम पर एक भव्य गेस्ट हाउस व म्यूजियम (संग्रहालय) का निर्माण किया जाए। साथ ही उन्होंने सलुड-औली ट्रैक को मोटर मार्ग से जोड़कर स्थानीय ग्रामीणों को होमस्टे योजना के जरिए स्वरोजगार से जोड़ने की पुरजोर मांग की।
स्थानीय युवा प्रतिनिधि वैभव सकलानी ने ज्योतिर्मठ नगर की नागरिक सुविधाओं और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार को लेकर कई व्यावहारिक सुझाव और मांगें रखीं। उन्होंने विष्णुप्रयाग पैदल पुल के पुनर्निर्माण की आवश्यकता जताई और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल औली में बेसहारा घूमने वाले पशुओं के लिए उचित रेन शेल्टर व पानी की व्यवस्था करने की मांग की। वैभव ने नगर की सुंदरता और धार्मिक शुचिता का हवाला देते हुए नरसिंह मंदिर बाईपास सड़क पर स्थित मोर्चरी (शव गृह) को शहर के बीच से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का आग्रह किया। इसके अलावा, उन्होंने ज्योतिर्मठ की सबसे बड़ी समस्या ‘यातायात जाम’ का समाधान सुझाते हुए कहा कि बंद पड़े पुराने महिला अस्पताल की खाली पड़ी भूमि पर एक बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कराया जाए, जिससे शहर को ट्रैफिक की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके…
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता की सभी जायज मांगों को बेहद गंभीरता से सुना और प्राप्त सभी ज्ञापनों पर नियमानुसार त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई करने का भरोसा दिया। उन्होंने अधिकारियों को भी जनभावनाओं के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व धर्म अधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, भाजपा मंडल अध्यक्ष अमित सती, बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य राकेश भंडारी, सुभाष डिमरी, हर्षवर्धन भट्ट सहित वन विभाग और जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासनिक अमले में प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र, उप वन संरक्षक अभिमन्यु, मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिषेक त्रिपाठी, वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल और गौरव नेगी सहित भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक और क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।
