टिहरी गढ़वाल के देवलगांव (प्रतापनगर) में प्रेम प्रसंग के एक मामले को लेकर अनुसूचित जाति के एक नाबालिग युवक, केतन लाल की बेरहमी से की गई जघन्य हत्या के खिलाफ संपूर्ण देवभूमि में जन-आक्रोश लगातार सुलग रहा है। इस अमानवीय और हृदयविदारक घटना को लेकर ‘पार्वतीय शिल्पकार कल्याण सभा, उत्तराखण्ड’ ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। संगठन ने इस निर्मम वारदात को सीधे तौर पर घोर जातिवादी मानसिकता से प्रेरित बताते हुए महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक तीखा व विस्तृत ज्ञापन बुधवार उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ के माध्यम से प्रेषित किया गया।
पार्वतीय शिल्पकार कल्याण सभा ने साफ तौर पर कहा है कि अपराधियों के दिलों में कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है और ऐसी जातिवादी बर्बरता को समाज में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने समाज में शांति और सौहार्द की भावना बनाए रखने की अपील करते हुए शासन-प्रशासन से तत्काल न्याय की मांग की है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से पांच सूत्रीय मुख्य मांगें की गई हैं, जिनमें पूरे मामले की समयबद्ध सुनवाई फास्ट ट्रैक न्यायालय में कराकर दोषियों को फांसी की सजा दिलाने, पीड़ित परिवार को आजीवन भरण-पोषण हेतु उचित मुआवजा व तत्काल 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने, तथा परिवार के एक सदस्य को उत्तराखंड सरकार में सरकारी नौकरी देने की मांग प्रमुखता से शामिल है।
ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से कुशला लाल लोहनी (ब्लॉक अध्यक्ष, पार्वतीय शिल्पकार कल्याण सभा समिति, ज्योतिर्मठ, जिला-चमोली), विनोद लाल शाह, महेंद्र दयाल, नरेंद्र लाल, प्रताप लाल, बसन्त लाल, बुद्धि लाल एवं सुभाष सहित पार्वतीय शिल्पकार कल्याण सभा उत्तराखंड, ज्योतिर्मठ के अन्य समस्त पदाधिकारी व प्रबुद्ध नागरिकगण शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित पक्ष को अविलंब उचित कानूनी संरक्षण, निष्पक्ष जांच और ठोस आर्थिक न्याय नहीं मिला, तो अनुसूचित जाति समाज पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन को विवश होगा।
