गोपेश्वर।
उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा लगातार समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में चमोली जनपद से भारतीय जनता पार्टी की बेहद सक्रिय और वरिष्ठ महिला नेता श्रीमती चंद्रकला तिवारी को उत्तराखंड राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन द्वारा इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी के संगठन, महिला मोर्चा और उनके समर्थकों में भारी खुशी की लहर दौड़ गई है। सभी ने इसे एक जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ता का सच्चा सम्मान बताया है। पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस निर्णय से यह पूरी तरह स्पष्ट होता है कि वर्तमान सरकार अपने संगठन और समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रति कितनी गंभीर है। सरकार लगातार हर छोटे और सक्रिय कार्यकर्ता की योग्यता एवं उनके पूर्व के कार्यों का सही मूल्यांकन कर उन्हें उचित दायित्वों से नवाज रही है। चंद्रकला तिवारी को यह बड़ी जिम्मेदारी मिलना उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष, सांगठनिक क्षमता और पार्टी के प्रति अटूट समर्पण का ही परिणाम माना जा रहा है।
श्रीमती चंद्रकला तिवारी का जीवन और उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि
चमोली जनपद के संघर्षों से जुड़ी रही है। 28 मई 1975 को चमोली के कर्णप्रयाग अंतर्गत ग्राम नौली में स्वर्गीय मतिधर प्रसाद खाण्डूड़ी एवं स्वर्गीय उर्वशी देवी खाण्डूड़ी के घर जन्मी चंद्रकला तिवारी ने अपनी प्रारंभिक व उच्च शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही प्राप्त की। उन्होंने राजकीय महाविद्यालय कर्णप्रयाग से स्नातक (Graduation) की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में उनका विवाह श्री राकेश तिवारी के साथ हुआ है, और उनका मूल ग्राम मठ (झिनका) है, जबकि वह वर्तमान में गोपेश्वर के मंदिर मार्ग स्थित तिवारी भवन में निवास करती हैं।
राजनीतिक सफर की बात करें तो श्रीमती चंद्रकला तिवारी वर्ष 2003 से ही भारतीय जनता पार्टी में एक सक्रिय प्राथमिक कार्यकर्ता के रूप में जुड़ी थीं। उन्होंने संगठन में कदम-कदम पर अपनी नेतृत्व क्षमता को साबित किया है। वर्ष 2004 से 2006 तक उन्होंने महिला मोर्चा में नगर उपाध्यक्ष के रूप में दायित्व संभाला। इसके बाद, वर्ष 2007 से 2009 तक वह नगर मंडल गोपेश्वर में महामंत्री के पद पर रहीं। उनकी सांगठनिक सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें 2010 से 2012 तक महिला मोर्चा का नगर अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके उपरांत, वर्ष 2013 से 2015 तक वह महिला मोर्चा की जिला महामंत्री की जिम्मेदारी संभालते हुए पूरे जिले में संगठन को मजबूती देने में जुटी रहीं।
उनकी सामाजिक और राजनैतिक सक्रियता का दायरा लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2015 से 2018 के बीच उन्होंने चमोली जनपद में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के जिला संयोजक के रूप में बेहतरीन कार्य किया। इसके बाद वह 2017 से 2019 तक महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहीं। पार्टी ने उनके नेतृत्व को देखते हुए 2019 से 2021 तक उन्हें महिला मोर्चा का जिला कार्यकारी अध्यक्ष और फिर 2021 से 2023 तक जिला अध्यक्ष पद की कमान सौंपी। हाल ही में वह वर्ष 2023 से 2026 के लिए महिला मोर्चा की गढ़वाल संयोजक के रूप में पूरे संभाग में संगठन को धार दे रही थीं, जिसके बाद अब धामी सरकार ने उन्हें राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष जैसी बड़ी गरिमामयी जिम्मेदारी से नवाजा है।
सामाजिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की सूची भी काफी लंबी है। उन्हें वर्ष 2017 में ‘राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान’ और वर्ष 2018 में ‘पर्यावरण संरक्षण अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। वैश्विक महामारी के दौरान जनता की निस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें वर्ष 2020 में ‘कोरोना वॉरियर प्रमाण पत्र’ दिया गया। इसके अतिरिक्त, अदम्य साहस और उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें उत्तराखंड राज्य के प्रतिष्ठित ‘राज्य स्तरीय तीलू रौतेली पुरस्कार (2020-21)’ से भी नवाजा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रकला तिवारी को राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष बनाए जाने से न सिर्फ चमोली बल्कि पूरे गढ़वाल मंडल में महिलाओं की समस्याओं के त्वरित निस्तारण और महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।
