जोशीमठ
चमोली और रुद्रप्रयाग जनपद के सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने तथा चारधाम यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कृष्णमणि थपलियाल द्वारा सौंपे गए जनहित के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव का संज्ञान लेते हुए गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड सरकार के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज को पत्र भेजकर अवशेष सड़क निर्माण कार्य की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति देने का अनुरोध किया है। सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह मार्ग धार्मिक, सामरिक और क्षेत्रीय विकास के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और आवश्यक है, जिसके पूरा होने से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के मध्य एक मजबूत और प्रभावी वैकल्पिक संपर्क मार्ग (सतत राजमार्ग कॉरिडोर) विकसित हो सकेगा।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की पृष्ठभूमि की बात करें तो भाजपा नेता कृष्णमणि थपलियाल ने सांसद अनिल बलूनी को एक विस्तृत परियोजना प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें उन्होंने बताया था कि प्रस्तावित मार्ग केदारनाथ हाईवे के ‘कुंड’ से प्रारंभ होकर चोपता, गोपेश्वर, कुंजोमोकोट, स्यूण, डुमक, कलगोठ, उरगम, थैंग और चाईं होते हुए मारवाड़ी (जोशीमठ) में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ेगा। उन्होंने सांसद को अवगत कराया कि इस पूरे मार्ग के अधिकांश खंड प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत पहले से ही निर्मित और संचालित हैं, लेकिन दो महत्वपूर्ण हिस्सों में काम रुका होने के कारण यह पूरा कॉरिडोर आपस में जुड़ नहीं पा रहा है। इन अवशेष खंडों में स्यूण गांव से कलगोठ गांव तक लगभग 9 किलोमीटर और अलोसी (अरोसी) गांव से थैंग गांव तक लगभग 7 किलोमीटर की दूरी शामिल है, जिसकी कुल अनुमानित लंबाई 16 किलोमीटर बैठती है।
सांसद अनिल बलूनी ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को लिखे अपने पत्र में कहा है कि इस 16 किलोमीटर के छूटे हुए हिस्से का निर्माण पूरा होते ही चारधाम यात्रा के दौरान मुख्य मार्गों पर रहने वाला यातायात का भारी दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा, आपदा अथवा किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में सेना, स्थानीय प्रशासन और श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित व वैकल्पिक आवागमन का रास्ता हर समय उपलब्ध रहेगा। सांसद ने यह भी रेखांकित किया है कि इस मार्ग के पूरी तरह सक्रिय होने से इस पूरे ट्रैक से जुड़े दर्जनों दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे सीमांत व पर्वतीय क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।
प्रस्ताव में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया है कि मानसून या भूस्खलन के कारण जब कभी राष्ट्रीय राजमार्ग-07 बाधित होता है, तब यह वैकल्पिक मार्ग यात्रियों और स्थानीय जनता के लिए जीवन रेखा साबित होगा। बलूनी ने लोक निर्माण मंत्री से जनता की बेहद जरूरी मांग और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस 16 किलोमीटर के अवशेष सड़क निर्माण कार्य के लिए बिना किसी विलंब के आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान करने का पुरजोर आग्रह किया है। इस पत्र के सामने आने के बाद अब चमोली और रुद्रप्रयाग के सीमांत ग्रामीणों में इस बहुप्रतीक्षित सड़क कॉरिडोर के जल्द पूरा होने की उम्मीदें एक बार फिर जग गई हैं।
