Home » Blog » साक्ष्यों के अभाव में मौलाना अब्दुल लतीफ दोषमुक्त

साक्ष्यों के अभाव में मौलाना अब्दुल लतीफ दोषमुक्त

ज्योर्तिमठ न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुनाया फैसला

by zerogroundnews

ज्योर्तिमठ।

करीब पांच साल पहले बदरीनाथ धाम को लेकर की गई एक कथित विवादित टिप्पणी के मामले में ज्योतिर्मठ की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष द्वारा ठोस तकनीकी प्रमाण पेश न कर पाने के कारण, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिल कुमार कोरी की अदालत ने मौलाना अब्दुल लतीफ को सभी आरोपों से बाइज्जत दोषमुक्त कर दिया है।

विवाद की शुरुआत 26 जुलाई 2021 को हुई थी,जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। आरोप था कि मौलाना अब्दुल लतीफ ने अपने भाषण में हिंदुओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम को ‘बदरुद्दीन शाह’ बताया था। वीडियो में कथित तौर पर यह भी कहा गया था कि यह स्थान मुसलमानों का है और इसे उन्हें सौंप दिया जाना चाहिए।
इस बयान ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई, जिसके बाद उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री को भी इस मामले में हस्तक्षेप के लिए कहा गया और बदरीनाथ थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।

अधिवक्ता नवनीत डिमरी ने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच के बाद 21 अगस्त 2023 को न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया था। इस मामले में 11 नवंबर 2024 को साक्ष्य पेश किए गए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि उक्त वीडियो किस IP एड्रेस से, किस तारीख और किस समय अपलोड किया गया था। पुलिस को यूट्यूब के माध्यम से भी वीडियो की सत्यता और स्रोत के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी थी। अदालत ने माना कि बिना किसी ठोस डिजिटल प्रमाण के धारा 153ए और 295ए के तहत अपराध सिद्ध करना संभव नहीं है।

30 जनवरी 2026 को अदालत में फैसला सुनाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मौलाना अब्दुल लतीफ को फौजदारी वाद संख्या 80/2023 के आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने उनके पूर्व के व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानतनामे भी निरस्त कर दिए हैं।