Home उत्तराखण्ड बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा की तैयारियां तेज;

बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा की तैयारियां तेज;

कर्मचारियों ने उठाई पदोन्नति और वेतन विसंगति की आवाज

by zerogroundnews

​ज्योर्तिमठ।
23 अप्रैल को भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का शंखनाद होने जा रहा है। इसी क्रम में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने यात्रा के सफल संचालन के लिए कमर कस ली है। ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में BKTC उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी यात्रा व्यवस्थाओं और कर्मचारी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई।
​सफल यात्रा के लिए एकजुटता का संकल्प
​बैठक में केदारनाथ धाम के कर्मचारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। सभी कर्मचारियों ने आगामी यात्रा को सुगम और सफल बनाने के लिए समिति को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उपाध्यक्ष सती ने कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा की सफलता का मुख्य आधार हमारे कर्मचारी ही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समिति कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है और उनकी समस्याओं के समाधान हेतु सरकार से निरंतर वार्ता की जा रही है।

​बाहरी नियुक्तियों पर कर्मचारियों का कड़ा विरोध

​एक ओर जहां यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर बीकेटीसी कर्मचारी संघ ने संविदा और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से की जा रही बाहरी नियुक्तियों पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ के अध्यक्ष विराज सिंह बिष्ट ने उपाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर रिक्त पदों को बाहरी माध्यमों से भरने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। संघ का तर्क है कि विभाग के भीतर ही योग्य और अनुभवी कर्मचारी मौजूद हैं, ऐसे में बाहरी लोगों को तरजीह देना पुराने कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

​वेतन विसंगति और पदोन्नति का मुद्दा गरमाया

​कर्मचारी संघ ने वेतन में भारी अंतर और पदोन्नति में देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि:
​वेतन में असमानता:
पिछले 10-15 वर्षों से सेवा दे रहे पुराने कर्मचारियों को मात्र ₹8000 वेतन मिल रहा है, जबकि वर्ष 2025 में आउटसोर्स के जरिए आए नए कर्मचारियों को शासन के नियमों के तहत ₹19,700 दिए जा रहे हैं।

​लंबित पदोन्नति: कई वर्षों से कर्मचारियों की पदोन्नति और ए.सी.पी. (ACP) के मामले लंबित पड़े हैं, जिससे कर्मचारियों में मानसिक और आर्थिक निराशा है।

​उपाध्यक्ष की त्वरित कार्रवाई

​कर्मचारियों की जायज मांगों और आक्रोश को देखते हुए उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने मामले की गंभीरता को समझा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को निर्देश जारी किए कि बाहरी माध्यमों से की जा रही नियुक्तियों पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी कर्मचारी के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा और वरिष्ठता व योग्यता के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।