ज्योतिर्मठ।
ज्योतिर्मठ के उभरते टेबल टेनिस खिलाड़ियों का भविष्य वर्तमान में गहरे संकट में नजर आ रहा है। लंबे समय से एक समर्पित प्रशिक्षण केंद्र (Center) न होने के कारण अब बच्चों की नियमित ट्रेनिंग पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका को इस विषय में बार-बार अवगत कराया गया और केंद्र खोलने के लिए पत्राचार भी किया गया, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कथित उदासीनता और टालमटोल की नीति ने नेशनल लेवल की तैयारी कर रहे प्रतिभावान बच्चों को अधर में छोड़ दिया है।
वादों और पत्राचार के बीच उलझा खेल
पूर्व सभासद समीर डिमरी ने इस स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान भी टेबल टेनिस सेंटर खोलने के गंभीर प्रयास किए गए थे, लेकिन धरातल पर अब तक कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। सरकारी स्तर पर कई बार कागजी कार्रवाई हुई, लेकिन ठोस कार्यवाही के अभाव में खिलाड़ियों के सपनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रशासन बच्चों के भविष्य को लेकर अब भी गंभीर नहीं हुआ, तो क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ देंगी।
समाजसेवी संस्था का सहयोग और उपेक्षा का विरोध
विभागीय स्तर पर बुनियादी ढांचे की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी गिरीश कुमार ने 24 अप्रैल 2025 को नगर पालिका से एक निशुल्क हॉल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, क्योंकि खेल विभाग के पास अपना कोई स्थान नहीं था। सरकारी व्यवस्था न होने पर ‘रघुकेश’ नामक समाजसेवी संस्था ने पिछले चार वर्षों से अपना हॉल और टेबल खिलाड़ियों को उपलब्ध करवाया था।
हालांकि, 1 फरवरी 2026 को एक नया मोड़ आया जब संस्था ने हरिद्वार जिला क्रीड़ा अधिकारी की कथित पक्षपातपूर्ण नीतियों और ग्रामीण टीटी खिलाड़ियों के प्रति दिखाई जा रही उपेक्षा के विरोध में अपना हॉल और खेल सामग्री वापस ले ली।
प्रशिक्षण ठप: केवल ‘फिजिकल फिटनेस’ तक सीमित बच्चे
वर्तमान स्थिति यह है कि टेबल और हॉल के अभाव में प्रशिक्षु अब खेल की बारीकियां नहीं सीख पा रहे हैं। मुख्य प्रशिक्षक विजय कुमार ने जिला क्रीड़ा अधिकारी को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि आवश्यक उपकरणों और स्थान के बिना अब खिलाड़ियों को केवल शारीरिक फिटनेस ही करवाई जा सकेगी। यह उन खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा झटका है जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे थे। उचित संसाधनों की कमी ने अब इन बच्चों के खेल करियर पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
