Home उत्तराखण्ड माणा गांव का कूड़ा 90 किमी दूर बिरही भेजने की तैयारी

माणा गांव का कूड़ा 90 किमी दूर बिरही भेजने की तैयारी

जिला पंचायत ने भारत के प्रथम गांव माणा में ग्राम सभा से किया अनुबंध साइन

by zerogroundnews

चमोली।

उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत के प्रथम गांव ‘माणा’ के कचरा निस्तारण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक व पर्यावरणीय विवाद खड़ा हो गया है, जिसने चारधाम यात्रा के पीक सीजन में सरकारी बजट के सदुपयोग और अदूरदर्शी नीति पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दरअसल, जिला पंचायत द्वारा माणा गांव का कूड़ा एकत्रित कर उसे करीब 65 किलोमीटर दूर नीति क्षेत्र के तपोवन कूड़ा निस्तारण केंद्र में डंप करने का एग्रीमेंट किया गया था, जिसका भविष्य बद्री, नीती घाटी और बाबा गुदड़ी की तपस्थली ‘गर्मकुंड’ जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों की दुहाई देते हुए ढाक वार्ड-01 की जिला पंचायत सदस्य आयुषी बुटोला समेत स्थानीय जनता ने उग्र विरोध किया। जनआक्रोश के आगे झुकते हुए अब प्रशासन और ठेकेदार ने इस कूड़े को तपोवन के बजाय लगभग 85 से 90 किलोमीटर दूर ‘बिरही’ नामक स्थान पर भेजने की नई योजना तैयार की है,
स्थानीय प्रबुद्ध जनों का आरोप है कि जहां नगर पंचायत बद्रीनाथ और नगर पालिका जोशीमठ कचरे का सही निस्तारण कर करोड़ों की आमदनी कमा रहे हैं, वहीं जिला पंचायत द्वारा पीक यात्रा सीजन के भारी ट्रैफिक के बीच प्रतिदिन पिकअप वाहनों से 90 किलोमीटर दूर कचरा ढोना पूरी तरह अव्यावहारिक है और यह परिवहन के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये ठिकाने लगाने की साजिश है।

दूसरी ओर, मामले में सफाई देते हुए अपर विकास अधिकारी (जिला पंचायत) तेज सिंह ने बताया कि पूलना गांव के पास लगी मुख्य कंपैक्टर मशीन खराब होने के कारण यह संकट खड़ा हुआ है, जिसे ठीक किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तपोवन में विरोध के बाद अब पूरे विकासखंड का कूड़ा बिरही में डंप कर मशीन से कॉम्पैक्ट किया जाएगा, जिसे बाद में जिला पंचायत द्वारा बेचा जाएगा; साथ ही यदि पूलना की मशीन जल्द ठीक नहीं हुई, तो उस क्षेत्र का कचरा भी बिरही ही भेजा जाएगा।