एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना के विरुद्ध स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीणों का धरना मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा। इस बीच, आंदोलनकारियों और परियोजना प्रबंधन के बीच गतिरोध तोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं, लेकिन अब तक हुई वार्ताएं बेनतीजा रही हैं।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल की वार्ता रही विफल
आंदोलन के सातवें दिन भाजपा जिलाध्यक्ष (गजपाल सिंह बर्तवाल) के नेतृत्व में भाजपा नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तपोवन पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों के साथ संवाद कर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया। इस दौरान बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष (ऋषि प्रसाद सती) ने कहा कि बिना आपसी सकारात्मक वार्ता के इन 15 मांगों का समाधान संभव नहीं है। हालांकि, ग्रामीणों के सख्त रुख के कारण यह वार्ता भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
बुधवार को तहसील जोशीमठ में होगी अहम बैठक
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार के नेतृत्व में आज (बुधवार) तहसील जोशीमठ में एक महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई है। इस बैठक में एनटीपीसी प्रबंधन, जिला प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रशासन की कोशिश है कि वार्ता के जरिए आंदोलन को समाप्त कराया जाए और ग्रामीणों की जायज मांगों पर सहमति बनाई जा सके।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें और मुद्दे
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगों पर स्पष्ट मुहर नहीं लगती, आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
* निशुल्क बिजली और रोजगार: पूरे प्रभावित क्षेत्र को परियोजना से निशुल्क विद्युत आपूर्ति दी जाए और स्थानीय युवाओं को योग्यता के आधार पर रोजगार में प्राथमिकता मिले।
* सामुदायिक विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कंपनी अपनी कार्ययोजना और स्थिति स्पष्ट करे।
* आपदा पीड़ितों का हक: वर्ष 2021 की भीषण ऋषिगंगा आपदा में जान गंवाने वाले परिवारों के आश्रितों को उचित और स्थाई रोजगार मुहैया कराया जाए।
इनकी रही मौजूदगी
तपोवन में धरने के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह वर्तवाल, ऋषि प्रसाद सती, जगदीश सती, राकेश भंडारी सहित भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि क्षेत्र के विकास और हक-हकूक की इस लड़ाई में वे पीछे नहीं हटेंगे।
अब सबकी नजरें बुधवार को जोशीमठ तहसील में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जो इस सात दिवसीय आंदोलन का भविष्य तय करेगी।
