चमोली। आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध बनाने के उद्देश्य से आज चमोली जनपद सहित प्रदेश के 7 जनपदों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के संयुक्त तत्वावधान में एक वृहद मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस महा-अभ्यास का नेतृत्व देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक तथा मुख्य सचिव द्वारा किया गया, जिन्होंने सुबह 10:00 बजे से राहत-बचाव कार्यों की बारीकियों का निरीक्षण किया।
संयुक्त मोर्चे ने संभाली कमान
इस मॉक ड्रिल की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच का समन्वय रहा। इसमें भारतीय सेना (Indian Army), आईटीबीपी (ITBP), एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), फायर सर्विस और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य किसी भी वास्तविक आपदा के दौरान ‘रिस्पॉन्स टाइम’ (जवाबी कार्यवाही का समय) को कम करना और विभिन्न बलों के बीच आपसी तालमेल को और अधिक सटीक बनाना है।
इन 7 संवेदनशील स्थानों पर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
मॉक ड्रिल के दौरान जनपद के सात सबसे प्रमुख और संवेदनशील स्थलों पर अलग-अलग आपदाओं की कृत्रिम स्थितियां पैदा की गईं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
श्री बद्रीनाथ मंदिर: यहाँ अचानक आए भूकंप और उसके बाद पैदा हुई भगदड़ की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने और भीड़ नियंत्रण का सफल अभ्यास किया गया।
बद्रीनाथ पुल: मुख्य पुल के पास भगदड़ और यात्रियों के नदी में डूबने की सूचना पर जल पुलिस और एसडीआरएफ ने तत्काल बचाव अभियान चलाया।
बद्रीनाथ-गोविन्दघाट मार्ग: ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात और यात्रियों के फंसने की स्थिति में सेना और आईटीबीपी ने बर्फ काटकर रास्ता बनाने और फंसे लोगों को निकालने का डेमो दिया।
गोविन्दघाट-ज्योतिर्मठ मार्ग: भारी वर्षा और अचानक हुए भूस्खलन के कारण बाधित हाईवे को आधुनिक मशीनों से खोलने और फंसे वाहनों को निकालने की ड्रिल की गई।
जीएमबीएन (GMVN) ज्योतिर्मठ: पर्यटक आवास गृह में भीषण अग्निकांड और भगदड़ की घटना के बाद फायर सर्विस ने रेस्क्यू कर आग पर काबू पाया और घायलों को प्राथमिक उपचार दिया।
पागलनाला: भूस्खलन के लिए कुख्यात पागलनाला पर सड़क मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना के बाद सीमा सड़क संगठन (BRO) और प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया को परखा गया।
कमेडा गौचर: यहाँ एक भीषण बस दुर्घटना के दृश्य को री-क्रिएट किया गया, जिसमें स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने घायलों को अस्पताल पहुँचाने और आपदा प्रबंधन की क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
तकनीक और तत्परता का संगम
इस पूरे अभियान के दौरान आधुनिक संचार उपकरणों, बचाव टूल्स और आपदा प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया गया। प्रशासन ने यह संदेश दिया कि वह यात्रा के दौरान आने वाली हर छोटी-बड़ी चुनौती, चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव-निर्मित, उससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्थानीय निवासियों और भविष्य में आने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार के अभ्यास मील का पत्थर साबित होते हैं।
