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आजादी के 76 साल बाद भी सड़क को तरस रहा मौली हडूंगा:

इलाज के अभाव में ग्रामीण झेल रहे पीड़ा

by zerogroundnews

​दशोली।
एक ओर जहां देश आजादी का अमृत महोत्सव मनाकर विकास की नई गाथाएं लिख रहा है, वहीं उत्तराखंड के चमोली जिले के दशोली विकासखंड का सबसे दूरस्थ गांव मौली हडूंगा आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। आजादी के 76 वर्षों बाद भी यह गांव सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है, जिसका खामियाजा यहां के ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। हालिया घटना में गांव की एक महिला, गुड्डी देवी (पत्नी वीरेंद्र सिंह), पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को उन्हें कुर्सी के सहारे ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से होते हुए मुख्य मार्ग तक पहुंचाने में 8 से 10 घंटे का समय लग गया। 10 किलोमीटर के इस पैदल और दुर्गम सफर ने शासन-प्रशासन के विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
​फाइलों में दबा मुख्यमंत्री का वादा
​ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत इस गांव के लिए सड़क की मंजूरी दी गई थी। लेकिन धरातल पर काम होने के बजाय सड़क की फाइलें आज भी सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। जनता दरबार, तहसील दिवस और “बेमिसाल विकास” के नारों के बीच मौली हडूंगा के लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
​गर्भवती महिलाओं और बच्चों की दुर्दशा
​सड़क के अभाव में गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालात इतने बदतर हैं कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव से 3-4 महीने पहले ही गांव छोड़कर गोपेश्वर में कमरा किराए पर लेकर रहना पड़ता है। यही नहीं, 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के नियमित टीकाकरण के लिए भी ग्रामीणों को 10 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर गोपेश्वर जाना पड़ता है। विकासखंड का सबसे दूरस्थ गांव होने के कारण क्या यह क्षेत्र हमेशा सुख-सुविधाओं से भी दूर ही रहेगा? यह सवाल आज हर ग्रामीण की जुबान पर है।