देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए कथित “VIP” आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
अदालत में दाखिल याचिका में दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में उनका नाम बिना किसी जांच, साक्ष्य या न्यायिक आधार के जोड़ा गया है। याचिका के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस मामले में किसी भी “VIP” की कोई भूमिका नहीं पाई गई।
अदालत में पेश की गई लोकेशन और तारीख़ों की जानकारी
मानहानि याचिका के साथ दुष्यंत कुमार गौतम ने सितंबर 2022 के दौरान अपनी लोकेशन से संबंधित दस्तावेज़, सार्वजनिक कार्यक्रमों का विवरण और सोशल मीडिया गतिविधियों के रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत किए हैं। इन दस्तावेज़ों के अनुसार—
10 से 15 सितंबर 2022 तक – नई दिल्ली
16 सितंबर 2022 – उत्तर प्रदेश
17 व 18 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
19 सितंबर 2022 – उड़ीसा
20 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
याचिका में कहा गया है कि इन तिथियों के दौरान वे विभिन्न राज्यों में आधिकारिक गतिविधियों और बैठकों में व्यस्त थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घटना से जुड़े स्थान या परिस्थितियों से उनका कोई संबंध नहीं था।
‘VIP नैरेटिव’ को बताया गया मनगढ़ंत
दुष्यंत कुमार गौतम ने याचिका में आरोप लगाया है कि कुछ व्यक्तियों और राजनीतिक संगठनों ने बिना किसी ठोस तथ्य के “VIP” शब्द गढ़कर जानबूझकर उनके नाम से जोड़ने का प्रयास किया। जबकि चार्जशीट, ट्रायल या किसी भी न्यायिक दस्तावेज़ में उनका नाम कहीं दर्ज नहीं है।
उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया उनकी छवि धूमिल करने और एक संवेदनशील आपराधिक मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास है।
सोशल मीडिया ट्रायल पर उठाए सवाल
याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे तथाकथित “मीडिया ट्रायल” पर भी सवाल उठाए गए हैं। अदालत से अनुरोध किया गया है कि झूठे, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट को हटाने तथा बिना सबूत आरोप लगाने वालों पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएं।
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में दुष्यंत कुमार गौतम द्वारा दायर यह मानहानि याचिका उन आरोपों पर सीधा सवाल खड़ा करती है, जो बिना तथ्यों और आधिकारिक निष्कर्षों के सार्वजनिक मंचों पर लगाए जा रहे हैं।
