शीतकाल के दौरान कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के कारण बीते दिसंबर माह से थमे बद्रीनाथ मास्टर प्लान के पुनर्निर्माण कार्यों को एक बार फिर युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। मार्च के महीने में बद्रीनाथ धाम में खराब मौसम और रविवार से लगातार हो रही बर्फबारी के बावजूद निर्माण एजेंसियां मोर्चे पर डट गई हैं। धाम में इस समय अलकनंदा नदी के तट पर सुरक्षा दीवार के निर्माण और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ आधुनिक तकनीक से बन रहे हाई-टेक अस्पताल का कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न पैदल रास्तों को दुरुस्त करने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू हो गया है।
जोशीमठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले सभी प्रमुख व्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों को पूर्ण करना है। इसी क्रम में पी.ए.यू. (PAU) की टीम और लगभग 100 मजदूर धाम पहुँच चुके हैं, जबकि आगामी कुछ दिनों में 400 अतिरिक्त श्रमिकों की खेप भी कार्य में जुट जाएगी। पूर्व मे डीएम गौरव कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ समय रहते कार्य पूरा करें ताकि आगामी यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
हालांकि, वर्तमान में कार्य के साथ-साथ रसद आपूर्ति की चुनौती भी सामने आ रही है। धाम में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की किल्लत के चलते मजदूरों के लिए भोजन पकाने का संकट पैदा हो गया है। इस पर इंडियन गैस एजेंसी की प्रबंधक सीमा भंडारी ने आश्वासन दिया है कि निर्माण कार्यों में बाधा नहीं आने दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडरों की तत्काल व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि विषम मौसम के बावजूद आपूर्ति की इन समस्याओं का समाधान जल्द ही निकाल लिया जाएगा।
