ज्योतिर्मठ।
विश्व प्रसिद्ध स्कीइंग केंद्र औली ने पिछले 25 वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई महत्वपूर्ण शीतकालीन प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर खेल जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्ष 2000 में ‘ओपन नेशनल चैंपियनशिप’ के सफल आयोजन से शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँच चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, औली में वर्ष 2002, 2005 (अल्पाइन ओपन नेशनल), और 2008 में राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप आयोजित की गईं। वर्ष 2011 औली के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ, जब यहाँ ‘ओपन नेशनल चैंपियनशिप’ के साथ-साथ प्रतिष्ठित ‘साउथ एशियन विंटर गेम्स’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसने औली को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित कर दिया।
विकास का यह सिलसिला निरंतर जारी रहा, जिसमें वर्ष 2013 में प्रदीप रावत मेमोरियल कप, 2014 और 2015 में ओपन नेशनल नॉर्डिक व क्रॉस कंट्री बायोथलॉन चैंपियनशिप संपन्न हुईं। हाल के वर्षों में भी औली की बर्फानी ढलानों पर खिलाड़ियों का उत्साह कम नहीं हुआ; वर्ष 2019-20 में अल्पाइन/नॉर्डिक नेशनल चैंपियनशिप, 2022 में स्नो शोइंग और 2024 में ‘स्की माउंटेनियरिंग’ की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हुआ।
उत्तराखंड विंटर गेम संगठन के जॉइंट सेक्रेटरी अजय भट्ट, सचिव राकेश रंजन भिलंगवाल और टीम कोच विकेश डिमरी का कहना है कि औली को दुनिया में नई पहचान दिलाने के लिए इन खेलों का आयोजन अनिवार्य है। संगठन का मुख्य लक्ष्य यहाँ शीतकालीन खेलों के साथ-साथ अन्य साहसिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है।
वर्तमान वर्ष 2026 में भी औली ‘विंटर कार्निवल और ओपन नेशनल चैंपियनशिप’ की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। औली में होने वाली प्रतियोगिता में आईटीबीपी स्कीइंग संस्थान औली का विशेष योगदान रहता है यहां के अधिकारियों की मौजूदगी में प्रत्येक स्कीइंग चैंपियनशिप के आयोजन होते हैं जिसमें पूरे संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है…..
हालांकि, बर्फबारी की कमी या अन्य तकनीकी कारणों से कुछ वर्षों (जैसे 2001, 2004, 2016-18, 2021 और 2023) में प्रतियोगिताएं नहीं हो सकीं, लेकिन इसके बावजूद औली आज भारत में शीतकालीन खेलों की राजधानी के रूप में निरंतर उभर रहा है।
