चमोली। उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा की सबसे बड़ी लोक आस्था से जुड़ी हिमालयी यात्रा को लेकर चला आ रहा असमंजस सोमवार को समाप्त हो गया। नंदानगर में आयोजित 484 गांवों की महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026 में यात्रा हर हाल में आयोजित की जाएगी, और अब इसे ‘नंदा राजजात’ के बजाय ‘नंदा की बड़ी जात’ (ठुलि जात) के नाम से जाना जाएगा।
महापंचायत में स्पष्ट किया गया कि यात्रा अगस्त–सितंबर के पारंपरिक समय में ही संपन्न होगी। यात्रा स्थगित किए जाने की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सदियों पुरानी परंपरा को पूरी आस्था के साथ निभाने का संकल्प लिया।
पहली बार गठित हुई ‘बड़ी जात समिति’
यात्रा के सुचारु, पारदर्शी और जनसहभागिता आधारित संचालन के लिए इतिहास में पहली बार ‘बड़ी जात समिति’ के गठन का निर्णय लिया गया। समिति में क्षेत्र के 484 गांवों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और मंदिर समितियों के सदस्य शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यात्रा के संचालन को सीधे स्थानीय समाज के हाथों में सौंपना है।
कुरुड़ मंदिर से ही होगी यात्रा की शुरुआत
महापंचायत में सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति की मांग को स्वीकार करते हुए यह भी तय किया गया कि वर्ष 2026 की नंदा की बड़ी जात की आधिकारिक शुरुआत कुरुड़ मंदिर से ही होगी। वक्ताओं ने कहा कि कुरुड़ मां नंदा का मूल स्थान है, इसलिए यात्रा की धार्मिक और सांस्कृतिक धुरी यही होगी।
23 जनवरी (बसंत पंचमी) को बनेगी विस्तृत रूपरेखा
यात्रा के मार्ग, कार्यक्रम और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए 23 जनवरी, बसंत पंचमी को अगली बैठक आयोजित की जाएगी। इसी बैठक में यात्रा की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर सार्वजनिक की जाएगी।
महापंचायत के इस ऐतिहासिक निर्णय को लेकर पूरे जनपद में उत्साह का माहौल है, क्योंकि यह फैसला धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और क्षेत्रीय अस्मिता—तीनों को एक नई दिशा देता है।
