ज्योतिर्मठ।
तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच चल रहा गतिरोध खत्म करने के लिए तहसील सभागार में जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। पिछले 8 दिनों से अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे प्रभावित ग्रामीणों ने बैठक में अपनी समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। इस दौरान मुख्य रूप से चारापत्ती मुआवजा, स्थानीय रोजगार और सामुदायिक विकास के कार्यों में हो रही देरी का मुद्दा छाया रहा। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि चारापत्ती मुआवजे के तकनीकी पहलुओं को लेकर वे स्वयं ऊर्जा सचिव को पत्र लिखेंगे और शासन से आने वाले जवाब के आधार पर ग्रामीणों के हित में कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग चारापत्ती मुआवजे को लेकर रही, जिस पर एनटीपीसी प्रबंधन ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए इस मामले को अपनी उच्च प्रबंधन (हायर अथॉरिटी) के समक्ष रखने की बात कही। कंपनी प्रशासन ने आश्वासन दिया कि वे सकारात्मक सुझावों के साथ उच्चाधिकारियों को पत्र भेजेंगे और आगामी 20 दिनों के भीतर इस पर ठोस कार्यवाही की जाएगी। तय हुआ कि बैठक की कार्यवाही और कंपनी के इस आश्वासन को धरना स्थल पर ग्रामीणों के बीच रखा जाएगा, जिसके बाद ही आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने इस बात पर गहरा रोष जताया कि राष्ट्रीय हित की यह परियोजना जिसे 2012 में पूरा होना था, वह 2026 तक भी अधूरी है, जिसका खामियाजा स्थानीय जनता को भुगतना पड़ रहा है।
रोजगार के मुद्दे पर भी बैठक में काफी तल्खी देखने को मिली। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना की शुरुआत में स्थानीय लोगों को 70 प्रतिशत रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन वर्तमान में एनटीपीसी और उसकी सहायक कंपनियां केवल 50 से 55 प्रतिशत स्थानीय लोगों को ही काम पर रख रही हैं। आरोप यह भी है कि परियोजना में कार्यरत ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहे हैं और स्थानीय श्रमिकों को बिना किसी ठोस कारण के बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। कई मामलों में श्रमिकों को महीनों तक वेतन न देने की शिकायतें भी जिलाधिकारी के सामने रखी गईं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि स्थानीय युवाओं के हितों की अनदेखी हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल और एनटीपीसी की ओर से परियोजना प्रमुख अजय कुमार शुक्ला, एजीएम (एचआर) सुगातादास गुप्ता व डीजीएम देवेंद्र ग़बर्याल उपस्थित रहे। साथ ही प्रधान संगठन के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल, वार्ड सभासद प्रवेश डिमरी, ग्राम प्रधान भंग्यूल मिथलेश फर्स्वाण, रोशना देवी, विनीता देवी, लक्ष्मी देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य वर्षा बिष्ट और सरपंच शिशुपाल भंडारी समेत बड़ी संख्या में प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासन अब कंपनी के 20 दिन के अल्टीमेटम और शासन के जवाब पर टिकी नजरों के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश में जुटा है।
