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वाइब्रेंट विलेज योजना से छूटे सीमांत गांवों को शामिल करने की मांग, डॉ. मनोज रावत ने सांसद अनिल बलूनी को लिखा पत्र

डॉ. मनोज रावत ने सांसद अनिल बलूनी को लिखा पत्र

by zerogroundnews

(चमोली। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को गति दी जा रही है, लेकिन चमोली जिले के कुछ महत्वपूर्ण सीमांत गांव अभी भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं। भारतीय जनता पार्टी (अनु. जनजाति मोर्चा) के जिला अध्यक्ष डॉ. मनोज रावत ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को पत्र लिखकर छूटे हुए गांवों को तत्काल योजना में शामिल करने की मांग की है।
​नीति घाटी के कई गांव योजना से बाहर
​सांसद को भेजे गए पत्र में डॉ. मनोज रावत ने अवगत कराया कि ज्योतिर्मठ विकासखंड के अंतर्गत नीति घाटी के कई गांवों को केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना में शामिल किया गया है। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण ग्राम सभाएं तकनीकी कारणों या अन्य वजहों से इस सूची में जगह नहीं बना पाई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन गांवों का विकास और वहां बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमा सुरक्षा और स्थानीय पलायन को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
​इन गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव
​डॉ. रावत ने विशेष रूप से उन गांवों का उल्लेख किया है जो वर्तमान में इस योजना के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने निम्नलिखित ग्राम सभाओं को प्राथमिकता के आधार पर जोड़ने का आग्रह किया है:
​जेलम और जुम्मा
​कागा गरपक
​द्रोणागिरी
​ग्रामीणों की उम्मीदें और विकास की राह
​पत्र में विनम्र निवेदन करते हुए डॉ. रावत ने कहा कि यदि इन छूटी हुई ग्राम सभाओं को जल्द से जल्द वाइब्रेंट विलेज योजना का हिस्सा बनाया जाता है, तो यहां के स्थानीय ग्रामीणों को सीधे तौर पर सरकारी सुविधाओं और विकास कार्यों का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सांसद अनिल बलूनी के हस्तक्षेप से इन सीमांत क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। इस मांग का समर्थन करते हुए क्षेत्र के समस्त ग्रामवासियों ने भी उम्मीद जताई है कि उनकी आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचेगी।