ज्योतिर्मठ । नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदी के मध्य स्थित दुर्गम और खड़ी पहाड़ियों पर पिछले छह दिनों से धधक रही भीषण वनाग्नि पर आखिरकार वन विभाग की टीम ने अदम्य साहस और अथक प्रयासों से नियंत्रण पा लिया है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद वनकर्मियों ने ‘ग्राउंड जीरो’ पर मोर्चा संभालते हुए आग को फैलने से रोक दिया।
फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी चेतन कांडपाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीमें युद्धस्तर पर आग बुझाने में जुटी रहीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर को भी अलर्ट पर रखा गया था, किंतु नदियों में जलस्तर अत्यंत कम होने के कारण हेली-बकेटिंग संभव नहीं हो सकी। इसके चलते वन विभाग की टीमों ने पारंपरिक संसाधनों और मानवीय शक्ति के बल पर ही आग से मुकाबला किया।
वन क्षेत्राधिकारी चेतन कांडपाल ने बताया कि तकनीकी निरीक्षण के अनुसार प्रभावित क्षेत्र का ‘नॉर्दर्न आस्पेक्ट’ में होना तथा घने जंगलों में नमी मौजूद रहने से आग को विकराल रूप लेने से रोका जा सका। इससे वन्यजीवों, जैव विविधता और हरे वृक्षों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने से बचा लिया गया। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि सूखे के इस संवेदनशील मौसम में वनाग्नि की रोकथाम हेतु वन विभाग का सहयोग करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।
भ्यूंडार द्वितीय बीट में लगी इस आग को बुझाने के लिए वन दरोगा जय प्रकाश के नेतृत्व में 13 सदस्यीय दल ने जान की परवाह किए बिना खतरनाक ढलानों पर उतरकर आग पर काबू पाया। टीम ने ‘फायर बीटर्स’ और मिट्टी का उपयोग कर लपटों को शांत किया।
इस साहसी दल में वन आरक्षी मान सिंह राणा, अजय रावत, सुशील चौहान, नरेंद्र गुसाईं, मनोज भट्ट, प्रीतम रावत, अरविंद कुंवर, नागेंद्र सिंह, भरत सिंह सहित तीन अन्य वन श्रमिक शामिल रहे।
