चमोली। पहाड़ों में जनवरी का पहला सप्ताह बीतने के बावजूद बारिश और बर्फबारी न होने से सूखी ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। आसमान से राहत की बूंदें नहीं बरसीं, लेकिन रात के समय पड़ रहे भीषण पाले ने ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को खासा प्रभावित कर दिया है।
स्थिति यह है कि घाटी क्षेत्र में प्राकृतिक झरने जमने लगे हैं, जबकि पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइनों में पानी बर्फ बनकर जम गया है। इससे कई इलाकों में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
जोशीमठ–औली मार्ग बना खतरे का रास्ता
ज्योर्तिमठ–औली मोटर मार्ग पर जगह-जगह पाला जमने से सड़क कांच की तरह फिसलन भरी हो गई है। इससे वाहनों के फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
दीपक प्रसाद, निवासी सुनील क्षेत्र, बताते हैं—
“घरों के आसपास नलों से टपक रहा थोड़ा-सा पानी भी रात भर में जमकर पाला बन जा रहा है। सुबह ऐसा लगता है जैसे ताजा बर्फबारी हुई हो। पेयजल लाइनें पूरी तरह जाम हो गई हैं, जिससे रोजमर्रा के कामों में भारी परेशानी हो रही है।”
अनीता उनियाल, स्थानीय निवासी, कहती हैं—
“सुबह दफ्तर या जरूरी काम से निकलना मुश्किल हो गया है। स्कूटी और कारें सड़क पर बुरी तरह फिसल रही हैं। सुनील वार्ड के अधिकतर लोग सुरक्षा के लिहाज से मुख्य बाजार तक पैदल जाने को मजबूर हैं।”
नालियों की बदहाली बनी समस्या
प्रदीप पवार, सभासद सुनील वार्ड, का कहना है—
“जोशीमठ–औली मार्ग पर पानी की निकासी की व्यवस्था बेहद खराब है। आर्मी अस्पताल से नीलगिरी और औली तक कई जगह नालियां बंद पड़ी हैं। सड़क पर बहता पानी रात में जमकर पाला बन जाता है, जिससे आवागमन बेहद खतरनाक हो गया है।”
बीआरओ ने दिया सुधार का भरोसा
इस संबंध में अजय कुमार, एई, बीआरओ (BRO) ने बताया—
“औली रोड पर नालियों और सड़क पर बह रहे पानी की समस्या हमारे संज्ञान में है। जल्द ही अतिरिक्त मजदूरों को लगाया जा रहा है। जहां भी पाले के कारण दिक्कत हो रही है, उसे शीघ्र दुरुस्त किया जाएगा।”
फसलों पर भी मंडरा रहा संकट
बारिश न होने से जहां एक ओर धूल और प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं सूखी ठंड से रबी की फसलों और सेब के बगीचों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी गहरा गई है।
स्थानीय लोग अब बेसब्री से बर्फबारी या बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि ठंड से राहत मिले और पेयजल संकट कुछ हद तक दूर हो सके।
